कांग्रेस नेता राहुल गांधी के जन्मदिवस पर उत्तर प्रदेश के वाराणसी में कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए एक कृत्य पर विवाद खड़ा हो गया है। बनारस में राहुल गांधी के जन्मदिन के अवसर पर कार्यकर्ताओं ने उन्हें भगवान परशुराम के स्वरूप में दिखाया, उनकी पूजा-अर्चना की और उनकी तस्वीर का दूध से अभिषेक किया। इस घटना के सामने आने के बाद मध्य प्रदेश अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और इसे सनातन आस्था के साथ खिलवाड़ बताया है।
भगवान परशुराम राजनीतिक प्रतीक नहीं: पं पुष्पेंद्र मिश्रा
भोपाल में अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के प्रदेश अध्यक्ष पंडित पुष्पेंद्र मिश्रा ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इस कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि भगवान परशुराम कोई राजनीतिक प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे सनातन आस्था, तप, त्याग और धर्मरक्षा के शाश्वत प्रतीक हैं। करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं भगवान परशुराम से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में किसी भी राजनीतिक नेता के जन्मदिवस पर उन्हें भगवान के स्वरूप में प्रस्तुत करना बेहद आपत्तिजनक है और इसे किसी भी हाल में राजनीतिक प्रदर्शन का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।
व्यक्तिपूजा और धार्मिक प्रतीकों के दुरुपयोग से बचे कांग्रेस
ब्राह्मण समाज के प्रदेश अध्यक्ष ने कांग्रेस नेतृत्व को नसीहत देते हुए कहा कि राहुल गांधी एक राजनीतिक व्यक्ति हैं, उनका सम्मान अपनी जगह है, लेकिन उनकी तुलना साक्षात भगवान परशुराम से करना न तो उचित है और न ही यह सनातन परंपरा के अनुरूप है। कांग्रेस नेताओं को व्यक्तिपूजा की इस प्रवृत्ति और धार्मिक प्रतीकों के राजनीतिक उपयोग से पूरी तरह बचना चाहिए। अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज अपने आराध्य देवों का सर्वोच्च सम्मान करता है और उन्हें किसी भी प्रकार के राजनीतिक प्रचार अभियान का हिस्सा बनाए जाने का पुरजोर विरोध करता है।
ब्रांडिंग नहीं, आदर्शों को अपनाने की जरूरत
पंडित पुष्पेंद्र मिश्रा ने आगे कहा कि आज के समय में समाज को भगवान परशुराम के आदर्शों जैसे ज्ञान, तप, शौर्य और धर्म के प्रति अटूट समर्पण को अपने जीवन में उतारने की आवश्यकता है। उनके पावन स्वरूप का राजनीतिक ब्रांडिंग के लिए उपयोग करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इस घटना के बाद से ब्राह्मण समाज में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ गहरा रोष देखा जा रहा है।
रिपोर्ट- अनुराग अमिताभ
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